Sunday, February 28, 2010

बुरा न मानो होली हैं



जितना निराला हिंदुस्तान हैं उतने ही निराले उसके त्यौहार फिर चाहिए वो साल का पहला हो या आखिरी , दिन अच्छे हो या नही, जोश और ख़ुशी मैं कोई कमी नही | रही बात मेरे घर की, यो तो हर त्यौहार पर सभी घरवाले एक ही जगह एककृत होके पूर्ण हर्षौल्लास के साथ मौज मस्ती करते हैं लेकिन रंगीले राजस्थान से होने के कारण शायद होली का शुरू से ही एक विशेष स्थान रहा हैं , ख़ास कर मेरे लिए | जब तक हम सभी कोटा मैं थे, हमारे घर के होली पुरे शहर मैं जानी जाती थी और कमजोर दिल के लोग उस दिन हमारे घर के आस पास से भी नही गुजरते थे , महीनो हमारे घर के बाहर जमीन लाल गुलाबी रंगों मैं घुली रथी थी और लोगो के चेहरे पे हमारे साथ खेली गयी होली के रंगीन के निशान | इस मैं कोई दो राइ नही की होली मेरा प्रिय त्यौहार हैं , इसकी मस्ती , इसका जोश , इसका माहौल और इसकी भांग सब अपने आप मैं अपर्याय हैं | कुछ त्यौहार धार्मिक होते हैं और कुछ विदेशी अवतरित लेकिन मेरी नज़र मैं होली आज एक ऐसा त्यौहार हैं जो जाती , धर्म, रूप , रंग आदि सभी बंधन तोड़ के जीवन मैं मस्ती, प्यार और जोश का प्रतीक बन गया हैं | खैर, ये ब्लॉग होली के महत्व नही , उसके साथ जुड़े मस्ती भरे बॉलीवुड के रोमांच और रोमांस को उभारने के लिए लिख रहा हूँ और अब मैं अपने पसंद के चंद होली के गाने जो की सिनेमा के रूपहले परदे पे निखरे गए हैं पेश कर रहा हूँ |

१. रंग बरसे - सिलसिला मूवी का ये गीत यूँ तो किस्सी भी मौके , त्यौहार का मोहताज़ नही हैं लेकिन फिर भी होली की बात हो तो सबसे पहला जिक्र तो इसी गीत का होगा | हरिवंश राय बच्चन और उनके पुत्र अमिताभ बच्चन के बोल और सुरों ने एक गीत को अमर कर दिया हैं| अगर बोल, गीत और भांग का नशा कम पड़े तो रेखा की मादक अदाए इस मस्ती शब्द के पर्यायवाची गीत के सरुर को एक नया ही आयाम दे देती हैं|

२. होली के दिन दिल मिल जाते हैं - होली कब हैं, कब हैं होली ? गब्बर के इस क्रोध भरे सवाल के बाद फ्रेम अचानक से गुलाल, पिचारियों से भर जाता हैं , वीरू , बसंती और जय के साथ पूरा गाँव रंगों मैं खो जाता हैं| होली के साथ जुडी कृष्ण राधा के प्रेम और छेड़ छाड़ को बड़े ही मधुर रूप से रमेश सिप्पी ने सिल्वर स्क्रीन पे दर्शाया हैं इस गीत के द्वारे | ओ थेर जा रे भाभी, अरे जा रे शराबी, अरे का हो राजा, गली मैं आजा, होली रे होली, भंग की गोली, अरे नखरे वाली , अरे दूंगी मैं गाली, अरे रामू की साली, होली हैं होली ........................

३. होली खेले रघुवीरा अवध मैं - बागबान की एस गीत मैं एक बार फिरसे अमिताभ बच्चन ने अपने सुरों का जोर लगाया और भाई वाह क्या माजा दिलाया| आप सोच रहे होंगे अभी तक तीन के तीन गीत बच्चन साहब के ही हैं ऐसा क्यों ? लेकिन मैं भी क्या करो, होली को लेके अगर बॉलीवुड मैं किस्सी से सही मायने मैं मस्ती भरे थिरकने वाले गीत जुड़े हैं तो अधिकतर वो बच्चन साहिब के ही हैं| आदेश श्रीवास्तव के साथ इनदिनों उन्होंने बहुत गीत गाये हैं लेकिन इस गीत की बात ही अलग हैं| अवध मैं होली हैं तो बोली भी खहदी होनी चाहिए और बच्चन साहिब से अच्छा भाषा का ज्ञान और किसे होगा?

४. अरे जा रे हट नटखट - नवरंग फिल्म का ये गीत, हिंदी सिनेमा के इतिहास का नृत्य और संगीत के तर्क मैं सबसे परिपूर्ण गीत कहा जाये तो कोई अचम्भा नही होना चाहिए| जिस खूबसूरती से वि शांताराम ने इस गीत की कल्पना की और जिस आसानी से संध्या ने एक तरफ से लड़का और दूसरी तरफ से लड़की का किरदार निभाया हैं, उसकी जिनती तारीफ करी जाये कम् हैं| होली के रंग इतने मधुर और लचकदार कभी नही हुए जितने इस गीत मैं देखने को मिलते हैं|

५. आज ना छोड़ेंगे बस हमजोली - कटी पतंग के इस गीत मैं एक तरफ काका होली के रंगों मैं रंगे बस्ती वालों के साथ दूबे हुए हैं तो दूसरी तरफ आशा पारीक रंगों से भरे इस समुन्द्र मैं अपने श्वेत जीवन का शोक बना रही हैं, लेकिन काका भी हार नही मान रहे है... वो आज नही छोड़ेंगे चाहे भीगे चुनरिया चाहे भीगे चोली..

६. अंग से अंग लगाना - डर नाम हो मूवी का और इतना मजेदार गाना | अनुपम खेर, शाहरुख़ खान , जूही चावला , सन्नी देओल, रीमा लागू और यश राज चोपड़ा ने शिव हरी के साथ मिलकर एक बार फिरसे 'रंग बरसे' की यादी ताज़ा कर दी थी इस गीत के जरिये | वैसे रंग बरसे के जादू को ये ना न कर पाए और वो भी इस गीत का हिस्सा हैं....अरे जो जी मैं आये आज तुम वो कर लो, चाहे जिससे आज बाँहों मैं भर लो... आहा होली की बात अलग हैं , बुरा न मानो होली हैं :-)

७. मच गया शोर नारी नगरी रे - खुद्दार अमिताभ और कमसीन ख़ूबसूरत परवीन बाबी , लता मंगेशकर और किशोर कुमार के इस मस्ती मैं सराबोर गीत मैं , रंगों मैं भीगे हुए मुंबई की सडको पे मटकी फोड़ते हुए थिरक रहे हैं| शायद ब्रिज के एक बांके और गोपिका के खेल को लोग जन्मास्टमी से भी जोड़े लेकिन मुझे तो ये होली के खुशनुमा माहौल के ज्यादा करीब लगता हैं, आप खुद ही देख के फैसला करे..

कुछ और भी ख़ूबसूरत गीत हैं जो की मैं ऊपर व्यक्त नही कर पाया लेकिन वो किस्सी भी मायने मैं कम् नही ... सात रंग मैं खेल रहे हैं - आखिर क्यों , होली आई होली आई - मशाल, तन रंग लो जी मन रंग लो - कोहिनूर, भागी रे भागी ब्रिजबाला - राजपूत , जोगी जी धीरे धीरे - नदियाँ के पार , होली आई रे कन्हाई - मदर इंडिया , लेट्स प्ले होली - वक़्त (नयी) ..... आप भी कुच्छ जोड़े ??? शुरुआत मैंने राजस्थान से करी थी तो अंत भी एक राजस्थानी गीत से करूँगा...

होलिया मैं उड़े रे गुलाल कईयों मैं मंगेतर से.......... मारी ये मगेतर नखरे वाली.. ओ पीछे भागे रे नवाब , कईयों रे मंगेतर से..

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